राईसेम में सहकारी निरीक्षकों के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

सहकारिता अधीनस्थ सेवा के निरीक्षकों का फाउंडेशन कोर्स हरीश चन्द्र माथुर-राजस्थान लोक प्रशासन संस्थान (HCM-RIPA), जयपुर के मार्गदर्शन में राजस्थान सहकारिता शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (राईसेम), झालाना, जयपुर द्वारा आयोजित किया जाता है। RAS-2018 के माध्यम से नियुक्त निरीक्षकों का प्रशिक्षण दो समूहों में आयोजित किया गया, पहले समूह ने 11 मई 2011 से लेकर 5 जुलाई 2022 तक और दुसरे समूह ने 7 जुलाई 2022 से लेकर 30 अगस्त 2022 तक प्रशिक्षण प्राप्त किया। मेरा नंबर 80 लोगो के प्रथम समूह में ही आ गया था,  जबकि एक्सटेंशन लेने वाले और शेष अन्य साथियों का प्रशिक्षण कॉल दुसरे समूह में आया। ट्रेनिंग आर्डर आते ही हमने अपने-अपने कार्यालयों से कार्य मुक्त आदेश (Relieving order) प्राप्त किया और जयपुर के लिए रवाना हो गये। झालाना में राईसेम संस्थान स्थित हैं, इससे 400 मीटर की दुरी पर राईसेम हॉस्टल स्थित है। सबसे पहले हम हॉस्टल गये, जहां पर दो लोगो को एक रूम आवंटित किया गया। इसके बाद हम संस्थान गये, जहां पर अपने पदस्थापित कार्यालय से कार्यमुक्त आदेश, छ हजार रूपये हॉस्टल फीस की रसीद, 5-5 पासपोर्ट एवं स्टाम्प साइज़ फोटो जमा करवा कर एक आवेदन पत्र को भरके जमा करवाया। इसके बाद हमे अगले सप्ताह के कार्यक्रमों की सूची का एक पेज दिया गया।

उदघाटन समारोह
12 मई को उद्घाटन समारोह का कार्यक्रम था, इसमें माननीय सहकारिता मंत्री श्री उदय लाल आंजना जी मुख्य अतिथि थे। इस कार्यक्रम में OTS के महानिदेशक श्री वेंकटेश्वर, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार श्री मुक्तानंद अग्रवाल भी शामिल हुए। इसके अलावा राईसेम की निदेशक श्रीमती शिल्पी पांडे, अतिरिक्त निदेशक श्री मोरार सिंह जाड़ावत, उप रजिस्ट्रार श्रीमती सारिका गुप्ता एवं सहायक रजिस्ट्रार श्रीमती सीमा मालावत उपस्थित रही। इस समारोह के शुरू होने से पूर्व सभी को एक फोल्डर दिया गया, जिसमे एक प्रशिक्षण निर्देशिका, डायरी और एक पेन था, साथ ही एक पहचान पत्र दिया गया था।

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता किसानों से जुड़ा हुआ विभाग है। इसलिए संवेदनशील होकर किसानों की समस्याओं का सुलझाने का आव्हान किया। वही HCM-RIPA के महानिदेशक डॉ. आर. वेंकटेश्वरन ने कहा कि 3D-ड्यूटी, डिग्निटी एवं डिसिप्लिन का अपने कार्य के दौरान ध्यान रखे और नियमों की वाख्या जनता के हित में करे। रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल जी ने कहा कि सहकारिता के समक्ष अनेक चुनौतियां है फिर भी सहकारिता की प्रासंगिकता बनी हुई है। प्रशिक्षण के दौरान गंभीरता से सीखे, एक दुसरे की मदद करे और परिश्रम करके अपनी दक्षताओं में सुधार करे।

क्लास रूम एक्टिविटीज
अवकाश के दिनों को छोड़कर दो सत्रों में कक्षाये आयोजित होती थी। फाउंडेशन कोर्स के पाठ्यक्रम में 3 पेपर थे- 
  • प्रथम पेपर- राजस्थान की राजव्यवस्था, लोक प्रशासन, योजना एवं नीतियां।
  • द्वितीय पेपर - राजस्थान सेवा नियम (RSR), सामान्य वित्तीय एवं प्रशासनिक नियम (GF&AR), TA Rule।
  • तृतीय पेपर- कंप्यूटर एवं सूचना प्रोद्योगिकी।
इन पेपर में उल्लेखित टॉपिक पर कई विशेषज्ञों द्वारा सेशन लिए गये। इसके अलावा सहकारिता अधिनियम, ऑडिट से संबंधित कक्षाएं भी विभागीय जानकारी के लिए आयोजित की गई। तृतीय पेपर में कोई टॉपिक्स को कंप्यूटर लैब में प्रायोगिक तौर पर समझाया गया।
इसके अलावा कुछ सत्र गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के थे, जिन्हें द्वितीय पारी में आयोजित किया गया था। ये व्यक्तित्व विकास, पारस्परिक संबंध निर्माण के लिए महत्वपूर्ण थे-
  • आइस ब्रेकिंग सेशन : यह पहले दिन आयोजित किया गया, इसमें आपसी जान पहचान को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारी गतिविधियां करवाई गई थी। जैसे- लोगो को गृह जिले, जन्म तिथि के आधार पर साथ में खड़े करना, उनकी पारस्परिक विशेषताओं/समानताओं को पूछना आदि  
  • अंत्याक्षरी : इसमें गाने और नृत्य की गतिविधियां शामिल थी।
  • वाद-विवाद (Debate) : इसके लिए प्रशिक्षणार्थियों ने ही टॉपिक निर्धारित किए थे। 
  • मेडिकल चेक अप : डॉक्टर्स की टीम ने विभिन्न टेस्ट लिए और स्वास्थ्य को लेकर परामर्श प्रदान किया।
  • ऑफिसियल विजिट : झालाना में ही स्थित भामाशाह टेक्नो हब और भामाशाह स्टेट डाटा सेंटर का 40-40 के दो समूहों में विजिट करवाया गया।
हॉस्टल लाइफ
दो ट्रेनीज को एक रूम आवंटित किया गया था। रूम में बिस्तर, कुर्सी, मेज, एसी एवं अटैच्ड बाथरूम की सुविधा उपलब्ध थी। मेस में बेड टी, मॉर्निंग ब्रेकफास्ट, लंच एवं डिनर के अलावा दिन में 2 बार चाय-बिस्कुट शामिल थे। आवासीय सुविधा का कोई शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन भोजन के 300 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क लिया गया था।  हॉस्टल में होने वाले क्रियाकलापों में निम्न गतिविधियां शामिल थी- जैसे खेलकूद, जिम, मॉर्निंग एक्सरसाइज, बर्थडे सेलिब्रेशन। इसके अलावा उन सभी गतिविधियों के माध्यम से ट्रेनीज मनोरंजन करते थे, जो कि कॉलेज लाइफ में चलती है। कई स्थानों पर लघु समूहों में घुमने चले जाते थे।

परीक्षा 
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऊपर वर्णित तीन पेपरों के लिए एग्जाम आयोजित की गई थी। परीक्षा HCM-RIPA द्वारा करवायी गई थी। प्रोबेशन के बाद स्थायीकरण (Fixation) के लिए इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना आवश्यक था। इन तीन पेपर के अलावा टर्म पेपर एवं बुक रिव्यु और अन्य गतिविधियों के आधार पर भी अंक प्रदान किए गये थे।

निष्कर्ष
इस प्रकार फाउंडेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम में उन सभी आयामों पर जोर दिया गया, जो कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक होते हैं। हर सप्ताह ट्रेनीज से एक फीडबैक फॉर्म भरवाया जाता था, इससे ट्रेनिंग प्रोग्राम को अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलती थी। 

सहकारिता निरीक्षक की प्रोफाइल, कार्य एवं उत्तरदायित्व

RAS-2018 के सेवा आवंटन में मुझे सहकारिता अधीनस्थ सेवा आवंटित हुई, जिसके माध्यम से विभिन्न कार्यालयों में सहकारिता निरीक्षकों की नियुक्ति की जाती हैं। सेवा आवंटित होते ही 27 दिसम्बर 2021 को हमे नेहरु सहकार भवन जयपुर में आकर नियुक्ति ग्रहण करने को कहा गया था। निर्धारित तिथि को वहां पहुंचने पर हमसे नियुक्ति ग्रहण पत्र, शपथ पत्र एवं पोस्टिंग के लिए पांच जिलों की प्राथमिकता भरवाई गई। शपथ पत्र जुडिशल स्टाम्प पर देना था, तो थोड़ी ही दुरी पर स्थित हाई कोर्ट परिसर पर जाकर सभी साथी बनवाकर लाये थे। इस शपथ पत्र पर दो Surety और दो ही गवाहों के हस्ताक्षर करवाने थे, जो कि सभी ने एक दुसरे से करवाए थे। कुछ ऐसे भी नवनियुक्त निरीक्षकगण थे, जो RAS-2021 की मुख्य परीक्षा की तैयारी या पुरानी नोकरी से कार्यमुक्त नहीं होने या फिर अन्य कारणों से अपनी नियुक्ति ग्रहण करने की तिथि में विस्तार (Extension) चाहते थे। ऐसे साथी नियुक्ति संबंधित प्रपत्रों को भरने के बजाय विस्तार (Extension) हेतु सादे कागज़ पर प्रार्थना पत्र देकर आ गये थे। अगले दिन नियुक्ति ग्रहण करने वाले साथी चतुर्थ तल पर स्थित कांफ्रेंस हॉल में उपस्थित हुए, वहां पर सर्विस बुक बनवाई गई तथा संयुक्त रजिस्ट्रार (प्रशासन) मैडम ने उदबोधित किया और कई साथियों की शंकाओं का समाधान भी किया। तीसरे दिन भी हम सहकार भवन गए, हमे उम्मीद थी कि भरी गई प्राथमिकताओं के आधार पर किसी न किसी जिले में पोस्टिंग दे दी जाएगी। परन्तु पोस्टिंग आर्डर 21 जनवरी 2022 को जाकर जारी हो पाए। 

पोस्टिंग आर्डर

पोस्टिंग आर्डर जारी होने पर सभी साथियों को अलग-अलग कार्यालयों में पोस्टिंग दी गई। ये पोस्टिंग जिला स्तर पर उप रजिस्ट्रार कार्यालय एवं विशेष लेखा परीक्षक कार्यालय, जोनल स्तर पर जोनल रजिस्ट्रार कार्यालय एवं रीजनल ऑडिट ऑफिस तथा जयपुर स्थित प्रधान कार्यालय में दी गई।

पोस्टिंग देने में सभी प्रकार के समीकरण सामने आये। जैसे कि कुछ लोगों को अपने गृह जिले की प्रथम प्राथमिकता प्राप्त हो गई थी, कुछ लोगों को  दूसरी या अगली प्राथमिकता के आधार पर पोस्टिंग दे दी गई। कुछ लोगों को पांच जिलों की प्राथमिकता से भिन्न स्थान पर पोस्टिंग दी गई। इनमे ज्यादातर ऐसे निरीक्षक थे, जिन्होंने किसी प्रकार की डिजायर नहीं लगाई थी। डिजायर लगाने वालों को अपनी ऐच्छिक जगह पर पोस्टिंग मिल गई थी। कुछ ऐसे जिले होते है, जहां के स्थानीय व्यक्ति नहीं होने के कारण स्वीकृत पद खाली पड़े रहते हैं। ऐसे में ऐसी जगहों पर प्राथमिकता क्रम में नहीं होने के बावजूद भी पोस्टिंग दी गई थी। जैसे कि झालावाड, बारा, धौलपुर आदि। बाहर से आने वाले भी कुछ दिनों में अपना स्थानान्तरण करवा लेते हैं, ऐसे में इन जिलों में फ्रेशर को पोस्टिंग दी जाती रही है।

सहकारिता निरीक्षक की प्रोफाइल से पहले,  मैं आपको सहकारिता विभाग के विभिन्न कार्यालयों की कार्यप्रणाली से अवगत करा देता हूँ।

विभिन्न कार्यालय एवं उनके उत्तरदायित्व 

  • सहकारिता विभाग में सबसे निचले स्तर पर यूनिट ऑफिस होता है, जो कि सामान्यतया जिला स्तर पर होती हैं। राजस्थान में इस समय 37 यूनिट ऑफिस हैं, ये 33 जिलों के अतिरिक्त ब्यावर (अजमेर), खैरथल (अलवर), अनुपगढ, जयपुर (ग्रामीण) में स्थित हैं। ये यूनिट उप रजिस्ट्रार (DR ऑफिस) के अधीन कार्य करती हैं। सहकारिता विभाग के यूनिट एरिया के सभी काम  इस कार्यालय द्वारा किए जाते हैं, जैसे संस्थाओं का पंजीकरण, निर्वाचन, परिसमापन आदि। 
  • यूनिट ऑफिस के स्थान पर एक और कार्यालय होता है- विशेष लेखा परीक्षक कार्यालय (SAऑफिस)। इसका दायित्व इकाई कार्यालय में पंजीकृत सोसाइटियों की ऑडिट करवानी होती हैं। यह कार्यालय एक सहायक रजिस्ट्रार (AR) स्तर के अधिकारी के नियंत्रण में होता हैं।
  • इसके बाद जोनल स्तर पर भी दो कार्यालय होते हैं। प्रथम, जोनल रजिस्ट्रार जो कि अतिरिक्त रजिस्ट्रार (AD) स्तर का अधिकारी होता है। द्वितीय, क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी (RAO) जो कि संयुक्त रजिस्ट्रार (JR) स्तर का अधिकारी होता हैं।
  • इसके बाद सर्वोच्च स्तर पर प्रधान कार्यालय होता हैं, जहां पर क्षेत्र-वार बहुत सारे डिवीज़न हैं। इन डिवीज़न को एक संयुक्त रजिस्ट्रार स्तर का अधिकारी संभालता हैं, उसकी सहायता के लिए सहायक रजिस्ट्रार सहित अन्य अधिकारी होते हैं। इन डिवीज़न एवं जोनल कार्यालयों को मॉनिटर करने के लिए प्रधान कार्यालय में सीनियर स्केल के अतिरिक्त रजिस्ट्रार होते हैं।
  • प्रधान कार्यालय में सर्वोच्च स्तर का अधिकारी रजिस्ट्रार होता हैं। राजस्थान सहकारिता अधिनियम (RCS Act) 2001 के सभी कार्य रजिस्ट्रार के नाम से ही होते है। सभी यूनिट कार्यालय इन्ही की प्रत्यायोजित शक्तियों का प्रयोग करते हैं। परम्परागत रूप में रजिस्ट्रार एक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को नियुक्त किया जाता रहा हैं, हालांकि अधिनियम में किसी प्रकार का उल्लेख नहीं हैं।
  • सहकारी समितियों के प्रधान कार्यालय के बाद सचिवालय के अधिकारी होते हैं, जो विभाग के प्रधान सचिव के अधीन होते हैं।

SA ऑफिस झालावाड
पोस्टिंग आर्डर के माध्यम से मुझे विशेष लेखा परीक्षक के कार्यालय झालावाड में पोस्टिंग मिली थी। 24 जनवरी 2022 को मैंने यहां पर आकर कार्यग्रहण कर लिया। यह मेरी प्राथमिकता में शामिल नहीं था, फिर भी मुझे यहाँ पर पोस्टिंग दी गई। इसका एक कारण तो यह हो सकता हैं कि यहाँ पर स्वीकृत सभी पद खाली पड़े हुए थे। ऑडिट सहायक का चार्ज जो कि एक सीनियर इंस्पेक्टर के पास होना चाहिए, वो भी ऑफिस के LDC को दे रखा था। दूसरा यह कि मैंने किसी प्रकार की कोई डिजायर भी नहीं लगाईं थी। 

यहां पर SA का चार्ज भी उप रजिस्ट्रार साब को दे रखा था। वे बहुत ही सपोर्टिव थे, उन्होंने मुझे मार्च 2022 में होने वाली RAS-2021 की मुख्य परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देने के बारे में बोला। इसलिए परीक्षा के बाद मार्च में जाकर ही मैंने ऑडिट सहायक के रूप में कार्य शुरू किया। चूंकि SA साब का पद रिक्त था और अतिरिक्त चार्ज के भरोसे चल रहा था, साथ ही कोई सीनियर इंस्पेक्टर भी कार्यरत नहीं था। इसलिए काफी दिनों तक मुझे अपना काम ही समझ नहीं आया। 

ऐसी स्थिति में मैंने RCS Act, 2001 और RCS Rule, 2003 का अध्ययन शुरू किया तो कुछ चीजे ऑडिट के बारे में मेरी समझ में आई। जिनका विवरण इस प्रकार हैं-
  • RCS Act के अनुसार प्रत्येक सोसाइटी को प्रति वर्ष अपनी ऑडिट करवाकर ऑडिट रिपोर्ट को आम सभा में सभी सदस्यों के सामने प्रस्तुत करनी होती हैं।
  • प्रत्येक सोसाइटी को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरांत दो माह के भीतर ऑडिटर नियुक्ति का प्रस्ताव पारित करना होता हैं और इसकी सूचना SA ऑफिस में देनी होती हैं। अगर दो माह के भीतर SA ऑफिस को प्रस्ताव प्राप्त नहीं होता हैं तो ऑफिस अपनी तरफ से ऑडिटर नियुक्त कर देता हैं। ऐसी स्थिति में SA ऑफिस द्वारा विभिन्न एम्पनेल चार्टेड एकाउंटेंट/फ़र्म/या विभागीय ऑडिटर को शेष सोसाइटियों का ऑडिट आवंटन जारी किया जाता हैं।
  • प्रस्ताव या आवंटन के माध्यम से प्राप्त सोसाइटी की ऑडिट सितम्बर तक हो जानी चाहिए। इसके बाद विलंब पर नोटिस से लेकर आगे की कार्यवाही की जाती हैं।
  • ऑडिट रिपोर्ट में अलग से ऑडिट आक्षेप एक साथ उल्लेखित होते हैं। सोसाइटी को इन आक्षेपों को दूर करने के लिए SA ऑफिस द्वारा एक माह का समय दिया जाता हैं। इसकी अनुसार सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत आक्षेप अनुपालना रिपोर्ट की इंस्पेक्टर द्वारा पैरा वाइज जांच की जाती हैं और नोट लिखा जाता हैं कि आक्षेप दूर करने की अनुपालना की गई हैं या नहीं। सभी आक्षेपों की अनुपालना करने की स्थिति में इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर SA साब द्वारा आक्षेप निरस्तीकरण प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।
  • आक्षेप अनुपालना रिपोर्ट पर SA साब के निर्णय के विरुद्ध RAO साब को अपील की जा सकती हैं।
  • आक्षेप अनुपालना नहीं करने की स्थिति में SA साब द्वारा उप रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर सोसाइटी के विरुद्ध कार्यवाही की मांग जा सकती हैं।
इस प्रकार ऑडिट ऑफिस के कामकाज का संचालन होता हैं। यहाँ इंस्पेक्टर का काम मुख्यतः इस प्रकार होता हैं : सोसाइटी के प्रस्ताव प्राप्त नहीं होने की स्थिति में आवंटन करवाना। विभागीय निरीक्षकों को आवंटित सोसाइटी की खुद ऑडिट करना। ऑडिट आक्षेपों के अनुपालना की जांच करना। आदि। इस प्रकार देखा जाए तो ऑडिट ऑफिस में स्थित इंस्पेक्टर के पास ज्यादा काम नहीं होता हैं। परंतु ऑडिट इंस्पेक्टर का आराम उप रजिस्ट्रार कार्यालय वालो से देखा नहीं जाता और वे समय-समय पर काम आवंटित करते रहते हैं।

उप रजिस्ट्रार कार्यालय
उप रजिस्ट्रार कार्यालय में कार्यरत इंस्पेक्टर द्वारा विभिन्न काम किए जाते हैं। जिनका विवरण इस प्रकार हैं :
  1. सहकारी समितियों का पंजीकरण: इंस्पेक्टर द्वारा नवीन सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन में कागजी कार्यवाही संपन्न करवाई जाती हैं। इसके साथ ही   
  2. आम सभाओं का आयोजन : रजिस्ट्रार साब के निर्देशों के अनुसार आयोजित होने वाली आम सभा इंस्पेक्टर की निगरानी में संपन्न होती हैं। 
  3. सहकारी समितियों में निर्वाचन : सहकारी समितियों में निर्वाचन के दौरान इंस्पेक्टर द्वारा निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभाई जाती हैं। 
  4. सहकारी समितियों की धारा 55 के तहत जांच
  5. सहकारी समितियों का अवसायन एवं अवसायित समिति का पुनर्गठन
  6. गोदाम निर्माण की प्रगति की निगरानी
  7. विभिन्न प्रकार की निगरानी : इंस्पेक्टर द्वारा सक्रिय एवं निष्क्रिय सोसाइटी की जानकारी, समिति की वित्तीय स्थिति, समिति के अनुपयोगी सामान, समिति द्वारा ऋण एवं अनुदान के उपयोग, लाभांश वितरण की प्रगति, राजकीय ऋण एवं ब्याज की वसूली की निगरानी की जाती हैं।
  8. समितियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन: समिति के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी इंस्पेक्टर द्वारा किया जाता हैं।     
मैं SA ऑफिस में कार्यरत था, फिर भी DR ऑफिस के कई काम मुझे आवंटित किए गये, जैसे कि- पंजीकरण, भौतिक सत्यापन आदि। साथ ही, निर्वाचन के काम के लिए बहुत सारे इंस्पेक्टरों की जरुरत होती हैं, इसलिए सभी कार्यालयों में कार्यरत इंस्पेक्टर की ड्यूटी इसमें लगाईं जाती हैं। झालावाड में हुए ग्राम सेवा सहकारी समितियों के निर्वाचन में मुझे पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया था।

जोनल ऑफिस एवं हेड ऑफिस में कार्यरत इंस्पेक्टर विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हैं। इसके अलावा कुछ इंस्पेक्टरों को क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के सीईओ का चार्ज दे दिया जाता है।     

निष्कर्ष 
इस प्रकार सहकारिता निरीक्षक का कार्य बहुआयामी प्रकार का है। हालाकि 2013 के संशोधन के बाद इंस्पेक्टरों की निरीक्षण शक्ति को वापस ले लिया गया हैं, इससे वर्क लोड में कमी आई हैं। इसका फायदा उठाकर इंस्पेक्टरों को भावी सुधार के लिए पढाई-लिखाई पर ध्यान देना चाहिए। 

RAS-2018 के संदर्भ में मेडिकल एवं सेवा आवंटन प्रक्रिया

राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर द्वारा आयोजित होने वाली RAS परीक्षा में इंटरव्यू के बाद अंतिम परिणाम की घोषणा की जाती है। इस अंतिम परिणाम के आधार पर सेवाओं का आवंटन मेरिट एवं विज्ञापित रिक्तियों के अनुसार किया जाता हैं। सेवा आवंटन से पूर्व मेडिकल टेस्ट एवं पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूर्ण की जाती हैं। इस आलेख में RAS-2018 को आधार मानकर सेवा आवंटन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों का विवरण दिया गया हैं।

 RAS-2018 भर्ती की प्रक्रिया काफी लंबी चली थी। जुलाई 2021 में परिणाम घोषित होने के बाद 25 दिसम्बर 2021 को जाकर सफल अभ्यर्थियों को विभिन्न पदों को आवंटित किया गया। RAS के परिणाम एवं पद आवंटन की प्रक्रिया कई मायनों में UPSC से भिन्न हो जाती हैं। इस आलेख में हम UPSC के सापेक्ष तुलनात्मक अध्ययन करते हुए सेवा आवंटन तक की प्रक्रिया को समझेंगे।

परीक्षा में सेवा आवंटन की प्रक्रिया तक के विभिन्न चरण इस प्रकार हैं-

अंतिम परिणाम घोषित होना 

अंतिम दिन के इंटरव्यू के दिन ही अंतिम परिणाम घोषित किया जाता है। अंतिम परिणाम में कुल प्राप्तांकों के आधार पर सभी इंटरव्यू में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की श्रेणी-वार रैंक जारी की जाती हैं। इससे यह निर्धारित नहीं हो पाता है कि अंतिम किस रैंक तक उम्मीदवारों को सेवा आवंटन हो जाएगा।

इसके विपरीत UPSC में अंतिम परिणाम में उन ही अभ्यर्थियों को शामिल किया जाता हैं, जिन्हें सेवा आवंटन होना होता हैं। इसका कारण यह हैं कि इंटरव्यू के दौरान ही कार्मिक विभाग मेडिकल टेस्ट एवं पुलिस वेरिफिकेशन की कार्यवाही पूर्ण कर लेता हैं। जबकि RAS में RPSC एवं DOP दोनों के मध्य यह समन्वय नहीं रहता हैं।      

मेडिकल टेस्ट

एक रफ़ सेवा आवंटन कार्मिक विभाग द्वारा किया जाता हैं और इस रफ़ सर्विस एलोकेशन में जिस रैंक तक सेवा आवंटन की संभावना होती हैं, वहां तक रैंक वाले अभ्यर्थियों को संभाग स्तर पर चिकित्सा परीक्षण के लिए भेजा जाता हैं। 

कार्मिक विभाग द्वारा चिकित्सा परीक्षण का कार्यक्रम निर्धारित किया जाता हैं। संभाग स्तर पर स्थित हॉस्पिटल में मेडिकल टेस्ट के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया जाता हैं।

मेरा अनुभव 

मेरा मेडिकल सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर में हुआ था। मेरे साथ कुछ और भी लोग थे। वहां पर हमारी प्रक्रिया दो दिन चली थी, जिसका विवरण इस प्रकार हैं -

प्रथम दिन: हम मेडिकल टेस्ट के लिए निर्धारित रूम के बाहर खड़े थे। तभी कार्मिक विभाग का एक प्रतिनिधि आया और उसने अंदर अभ्यर्थियों की लिस्ट दी। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए मूत्र, खून, ECG और X-Ray टेस्ट के लिए पर्ची देकर DOP प्रतिनिधि के साथ हमे संबंधित प्रयोगशालाओं में भेज दिया गया। सभी प्रयोगशालाओं में सैंपल देने के बाद हमे अगले दिन आने की बोला गया ताकि तब तक सैंपल्स की रिपोर्ट आ जाए।

द्वितीय दिन : दुसरे दिन हमे Eye Test के लिए भेज दिया गया। हमारे साथ एक फॉर्म था, जिसमे डॉक्टर ने सभी की आँखों का विवरण लिख दिया। इसके बाद फिर से हम फिजिकल एग्जामिनेशन रूम के बाहर आ गये। यहाँ पर एक डॉक्टर ने सभी को बारी बारी से बुलाकर हर्निया की जांच की। इसके कुछ देर बाद फिजिकल टेस्ट करने वाला डॉक्टर आया, उसने ऊंचाई, छाती का प्रसार, वजन आदि माप नोट की और फ्लेट फीट का टेस्ट भी किया। इस प्रकार सारे टेस्ट होने के बाद हमसे फॉर्म में कुछ और अतिरिक्त जानकारी भरवाई गई। इसके बाद DOP प्रतिनिधि ने कहा कि अब आप जा सकते हो।

री-मेडिकल

कार्मिक विभाग का प्रतिनिधि सारे टेस्ट होने के बाद आवेदक के फॉर्म को ले जाता हैं। उस फॉर्म में सभी टेस्टों के बारे में उम्मीदवार का विवरण होता हैं। फॉर्म का कार्मिक विभाग द्वारा परीक्षण किया जाता हैं और उसके उपरांत कुछ मामलों में कुछ दिन के अंतराल के बाद उम्मीदवारों को री-मेडिकल के लिए बुलाया जाता है। कुछ अभ्यर्थियों के कुछ मेडिकल टेस्ट मापदंडों के अनुरूप नहीं आते हैं, ऐसे अभ्यर्थियों को कुछ दिन के उपरांत री-मेडिकल के लिए बुलाया जाता हैं। कुछ उम्मीदवार विभिन्न कारणों से अनुपस्थित रह जाते है, ऐसे अभ्यर्थियों को दूसरा अवसर दिया जाता हैं।

कुछ अन्य उम्मीदवारों को मेडिकल के लिए बुलावा

मेडिकल टेस्ट होने तक बहुत सारे उम्मीदवार अपने को मिलने वाली पोस्ट का अंदाजा लगा चुके होते हैं और अगर उनकी सेवा में कोई बदलाव की आशंका नही हो या पहले से कही दूसरी जगह अधिक लाभदायक पद पर हो तो ऐसे अभ्यर्थी मेडिकल टेस्ट से अनुपस्थित रह जाते हैं। इंटरव्यू रिजल्ट और मेडिकल की प्रक्रिया तीन से चार महीने ले लेती हैं, ऐसे में कुछ लोगो का UPSC में भी हो जाता हैं तो वे मेडिकल देने के बाद भी कार्मिक विभाग में शपथ पत्र देकर अपनी अभ्यर्थना वापस ले लेते हैं। इस प्रकार कुछ रिक्तियां सृजित हो जाती हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए संबंधित वर्ग से मेरिट के अनुसार अगले अभ्यर्थियों को मेडिकल के लिए बुलाया जाता हैं। यह एक प्रकार से अप्रत्यक्ष प्रतीक्षा सूची का कार्य करती हैं। इससे 5-10 अभ्यर्थी आसानी से लाभान्वित हो जाते हैं।   

सेवा आवंटन 

मेडिकल टेस्ट हो जाने वाले अभ्यर्थियों का समानांतर रूप से पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाता हैं। सभी अभ्यर्थियों के मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन हो जाने के बाद सर्विस एलोकेशन जारी कर दिया जाता हैं। यह आवंटन कार्मिक विभाग द्वारा संबंधित विभागों को भेजा जाता है, फिर संबंधित विभाग द्वारा ही अभ्यर्थियों को अग्रिम निर्देशों के साथ नियुक्ति की सूचना भेजी जाती हैं।   

प्रशिक्षण एवं फील्ड पोस्टिंग 

सेवा आवंटन आने के बाद संबंधित विभागों में रिपोर्ट करना होता हैं। जो अभ्यर्थी विभिन्न कारणों से तत्काल नियुक्ति नहीं चाहते हैं, वे नियुक्ति तिथि में विस्तार (Extension) के लिए आवेदन दे देते हैं। बाकी उम्मीदवार नियुक्ति ग्रहण संबंधित आवेदन एवं शपथ पत्र को भरके जमा करवाते हैं। ऐसी सेवाएँ जिनमे तत्काल प्रशिक्षण शुरू होना है, उनमे नियुक्ति संबंधित विस्तार (Extension) की अनुमति नहीं होती हैं।  

कुछ सेवाओं में सीधे HCM-RIPA, Jaipur में ही रिपोर्ट करना होता हैं, जैसे- RAS, RPS, RAcS एवं अन्य। इनमे नियुक्ति ग्रहण संबंधित कागजी कार्यवाही प्रशिक्षण स्थल पर ही हो जाती हैं, विभागों में जाने की जरुरत नहीं रहती। यही पर संबंधित विभागों के प्रतिनिधि आ जाते हैं।

नियुक्ति ग्रहण करने के बाद में कुछ सेवाओं में तत्काल आधारभूत प्रशिक्षण शुरू हो जाता हैं। राज्य सेवाओं का प्रशिक्षण OTS, जयपुर में होता हैं। कुछ सेवाओं का प्रशिक्षण RIPA के अन्य केन्द्रों उदयपुर एवं कोटा में भी होता हैं। अधीनस्थ सेवाओं में कुछ विभागों के अपने प्रशिक्षण केंद्र होते हैं, जैसे तहसीलदार सेवा के लिए अजमेर में, सहकारिता अधीनस्थ सेवा के लिए झालाना में राईसेम आदि।

जिन सेवाओं में तत्काल प्रशिक्षण शुरू नहीं होता, उनमे फिल्ड में अटेच कर दिया जाता हैं या पोस्टिंग दे दी जाती हैं। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षण के लिए बाद में बुलाया जाता हैं। 

UPSC के सापेक्ष तुलना 

UPSC के सापेक्ष तुलना करने पर हम पाते है कि मेडिकल एवं पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया इंटरव्यू के समानांतर पूर्ण की जा सकती हैं। इसके लिए कार्मिक विभाग एवं  RPSC के मध्य समन्वय स्थापित करना होगा। इससे प्रक्रिया को तीव्र करने में सहायता मिलेगी। 

निष्कर्ष

इस प्रकार RAS में अंतिम परिणाम से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया में विभिन्न चरण शामिल हैं, जो कई मायनों में केन्द्रीय सिविल सेवाओं से भिन्न हैं। इसमें अत्यधिक समय लगने की समस्या काफी गंभीर हैं, जिसे कम किए जाने की आवश्यकता हैं।      

UPSC कोचिंगों में कंटेंट डेवलपर के रूप में कैरियर की समीक्षा

कंटेंट डेवलपर या कंटेंट राइटर कोचिंग क्षेत्र में स्थायित्व ग्रहण करने की और बढ़ता हुआ एक क्षेत्र हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसमें कंटेंट डेवलप करना होता हैं। कोचिंग क्षेत्र में कई प्रकार के कंटेंट डेवलप किये जाते हैं, जैसे कि- स्टडी मटेरियल, करेंट अफेयर्स, डेली न्यूज़, मंथली मैगज़ीन, टेस्ट सीरीज, मॉडल आंसर इत्यादि। ये सब कंटेंट कोचिंग में पढने वाले छात्रों को उपलब्ध कराया जाता हैं।  कंटेंट एक प्राइमरी प्रोडक्ट की तरह भी कार्य करता हैं। इसी कंटेंट के आधार पर टीचर अध्यापन कार्य करवाता हैं, टेस्ट सीरीज करवाई जाती हैं और फिर मॉडल आंसर उपलब्ध कराये जाते हैं। इसी कंटेंट को एक्सप्लेनेशन विडियो बनाने के लिए भी प्रयुक्त किया जाता हैं। इस प्रकार कंटेंट कोचिंग इंडस्ट्री में एक प्राइमरी प्रोडक्ट की भूमिका निभाता हैं और कंटेंट बनाने वाले बेक एंड प्लेयर्स की भूमिका में होते हैं। कंटेंट डेवलपर की भूमिका टीचर के विपरीत होती हैं, वह छात्रों से सीधा जुड़ने के कारण फ्रंट एंड प्लेयर होता हैं। आजकल कोचिंग क्षेत्र अपनी गहरी जड़े जमा चूका हैं, कोटा, जयपुर, पटना, दिल्ली जैसे शहरों की अर्थव्यवस्था में कोचिंग क्षेत्र बड़ी भूमिका निभा रहा हैं। ऐसे में फ्रंट एवं बेक एंड दोनों की समान आवश्यकता महसूस की जा रही है। दोनों ही प्रोफाइल स्थायित्व ग्रहण कर रही हैं।

विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से इस आलेख में मैं अपने अनुभव को साझा कर रहा हूँ।

आपने इसे ज्वाइन करने का निर्णय क्यों लिया?

मैं 2015 में अपनी ग्रेजुएशन पूर्ण होने के बाद से लगातार यूपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सेवा की परीक्षा दे रहा था। तैयारी के माध्यम से मैंने अपनी एकेडमिक स्किल्स में काफी वृद्धि की थी। मैंने तीन बार मुख्य परीक्षा में कटऑफ के बहुत नजदीक अंक प्राप्त किए थे। 2016 में मेरा इंटरव्यू कॉल 12 मार्क्स (718/730) से रह गया था। 2018 में मैं UPSC सिविल सेवा के प्रीलिम्स में ही फ़ैल हो गया था परन्तु RAS का प्रीलिम्स पास हो गया था। ऐसे में 2019 में आयोजित RAS की मुख्य परीक्षा देने के बाद मैं पूरी तरीके से फ्री था, तब मैंने सोचा था कि अपने एकेडमिक नॉलेज का उपयोग करना चाहिए।

इसके अतिरिक्त पारिवारिक वित्तीय दबावों के कारण भी रोजगार प्राप्त करना आवश्यक था। चूँकि कोचिंग वाले वेतन भी अच्छा प्रदान कर रहे थे, जो कि सरकारी जॉब के समान ही था। इसलिए मुझे यह बेहतर विकल्प लगा।

आपकी जोइनिंग किस प्रकार हुई?    

ज्वाइन करने का निर्णय लेने के बाद, मुझे एक दोस्त ने बताया कि एक नई कोचिंग यूथ डेस्टिनेशन के नाम से शुरू हुई हैं, उसने एक दिन विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद मैं कोचिंग के ऑफिस गया और HR को अपना रिज्यूमे दिया, तीन दिन बाद उन्होंने मुझे टेस्ट के लिए बुलाया और कुछ सैंपल लिख कर लाने को कहा। अगले दिन सैंपल सबमिट करने के बाद कंटेंट हेड ने मेरी मुलाकात उच्चाधिकारी से करवाई, जिन्होंने इंटरव्यू लिया। इसके बाद मुझे अगले दिन से आने की बोल दिया, पर कहा कि अभी आप अपने आपको स्थायी नहीं माने, हम आपको सात दिन के ट्रायल पर रख रहे हैं। पर वे मेरे काम से पहले दिन ही खुश हो गये थे, तो उन्होंने अगले दिन कुछ दस्तावेज और बैंक डिटेल्स उपलब्ध करवाने को कह दिया था। इस प्रकार मेरी फर्स्ट जॉब की शुरुआत हुई। कहते हैं कि हमे अपने को पहली जॉब देने वालो को कभी नहीं भूलना चाहिए, इसलिए मैं भी HR मैडम पूजा शर्मा जी, कंटेंट हेड अतुल मिश्रा जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करना चाहता हूं।

यूथ डेस्टिनेशन में मेरा वेतन सोलह हजार रूपये था, इसलिए द हिन्दू में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर मैंने विज़न में भी आवेदन कर दिया था। जहाँ पर लिखित परीक्षा एवं इंटरव्यू के बाद मेरा चयन हो गया था और मेरा वेतन भी वर्तमान से दोगुना (बत्तीस हजार रूपये) था। यूथ डेस्टिनेशन में 35 दिन जॉब करने के बाद, मैंने 27 अगस्त 2019 को विज़न में अपना कैरियर शुरू किया था।

विज़न में कार्य संस्कृति किस प्रकार की थी?

विज़न आईएएस कोचिंग फॉर्मल सेक्टर में कार्य करता हैं, जिसमे हरेक एम्प्लोयी को सभी विधिसम्मत सुविधा प्रदान की जाती हैं। ज्वाइन करते समय कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के नियमानुसार ऑफर लैटर जारी किया जाता हैं, जिसमे वेतन, कार्यावधि एवं अन्य चीजों का वर्णन होता हैं। सप्ताह में 6 दिन प्रात: दस बजे से सांय छ: बजे तक कार्यदिवस होता था। सभी नेशनल होलीडे पर अवकाश होता था। बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम था। टेस्ट सीरीज और करंट अफेयर्स के लिए अलग-अलग टीम थी। मैं करेंट अफेयर्स वाली टीम में था।

टीम लीडर द्वारा रोजाना कार्य आवंटन किया जाता था। इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से प्रदान की जाती थी। ऑफिस जाने के बाद इसे पूर्ण करना होता था। 1500 शब्दों का काम रोजाना के हिसाब से आवंटित किया जाता था। अगर किसी के टॉपिक पहले कम्पलीट हो जाते तो उसे उन्हें फिर से देखने को कहा जाता था ताकि किसी प्रकार की कोई त्रुटि न रहे। इस प्रकार वर्क लोड ज्यादा नहीं था। कभीकभार ही काम 1800 शब्दों तक पहुंचता था। कार्य कितना ज्यादा है या कितना कम है, यह मैटर नही करता, टीम और टीम लीडर का व्यवहार बहुत अधिक महत्वपूर्ण हैं। टीम लीडर का व्यवहार बहुत ही सपोर्टिव था, वे आगे पढाई के लिए भी प्रोत्साहित करते थे। मेरे टीम लीडर ने प्रारंभ के 3 महीने इंडस्ट्री स्टैण्डर्ड को सिखाने में बहुत ही ज्यादा मदद की। इसलिए मुझे वर्क कल्चर भी बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा।

एक कंटेंट डेवलपर में किस प्रकार की स्किल्स होनी चाहिए?

एक कंटेंट डेवलपर में एकेडमिक और टेक्निकल स्किल्स होनी चाहिए। एकेडमिक स्किल्स में सब्जेक्ट का नॉलेज होना चाहिए ताकि प्रासंगिक चीजो को जोड़ा एवं आवश्यकतानुसार हटाया जा सके। उसी प्रकार टेक्निकल स्किल्स में MS-Word, Google Doc, गूगल इनपुट टूल और गूगल सर्च के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

कंटेंट डेवलपर की भूमिका एवं उत्तरदायित्व क्या होती हैं?

एक कंटेंट डेवलपर टीम लीडर द्वारा आवंटित कार्य के संपादन के लिए उत्तरदायी होता हैं। कोचिंग क्षेत्र में किए जाने वाले प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:

  • स्टडी मटेरियल तैयार करना और समय-समय पर अपडेट करना।
  • डेली न्यूज़, MCQ एवं अन्य अभ्यास पत्रक तैयार करना।
  • टेस्ट सीरीज तैयार करना और उनके मॉडल उत्तर तैयार करना। आदि

कंटेंट डेवलपर के कैरियर का भावी संभावना क्या हैं?

खुद कोचिंग का जीवनकाल बहुत छोटा होता है। इसलिए कोचिंग के बंद होने पर कंटेंट डेवलपर का कैरियर भी जोखिम में आ जाता है। इसलिए लॉन्ग टर्म के लिए इसकी सलाह नहीं दी जा सकती। हालांकि कंटेंट डेवलपर आगे फैकल्टी के रूप में पढाना शुरू कर सकता हैं, तब कैरियर को स्थायी बनाने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त हो जाते हैं।

किसी अभ्यर्थी को कब ज्वाइन करना चाहिए?

जब कोई अभ्यर्थी कम मार्क्स से रह जाता है और फिर से कोशिस करना चाहता हैं। अगर उसे वित्तीय दबाव महसूस हो रहा है, तब वह ज्वाइन कर सकता हैं। ऐसी स्थिति में ज्वाइन करने से वह पढाई से जुड़ा रहेगा और वित्तीय सहायता भी प्राप्त होगी। जो अभ्यर्थी कम मार्क्स से रहते हैं, और अगले अटेम्पट में भी काफी टाइम होता हैं, तब रूम पर खाली रहने के बजाय ज्वाइन कर लेना चाहिए। इससे न केवल वित्तीय आवश्यकता पूर्ण होती है, बल्कि जॉब का अनुभव भी हो जाता है।

हालाँकि मैं फ्रेशर को ज्वाइन नहीं करने की सलाह दूंगा, क्योंकि उन्हें अभी अपने अटेम्पट देने चाहिए। एक बार पैसे के लालच में फंस गये तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। जॉब करते वक्त इतना टाइम भी नहीं मिलता की ज्यादा पढाई कर सके।

निष्कर्ष 

कंटेंट डेवलपर पार्ट टाइम जॉब के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं। कुछ अच्छे संस्थानों में यह बेहतरीन करियर विकल्प प्रदान करता हैं। अभ्यर्थियों की डिमांड इस क्षेत्र में जॉब पाने के लिए बढ़ रही हैं, इसका फायदा फ्रीलांसर मोड़ में काम करवाने वाले उठा रहे हैं। इसलिए गैर-संगठित क्षेत्र के ऐसे अभिकर्ताओं को कानून के दायरे में लाने की आवश्यकता हैं। साथ हो कंटेंट डेवलपर को भी संगठित होकर इंडस्ट्री से बात करनी चाहिए। 

अवैध बजरी खनन पर रोक के प्रयास, उनकी सीमाएं और समाधान

राजस्थान ऐसा पहला राज्य नहीं है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगाई हो। लेकिन दुसरे राज्यों में 2 साल के बाद ही पर्यावरणीय अनुमति के साथ इसे हटा दिया गया था, उदाहरण के लिए उत्तराखंड। लेकिन राजस्थान में राज्य सरकार की लापरवाही को इस स्थिति के लिए उत्तरदायी माना जा रहा है। अगर नियमानुसार खनन होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इसने समय पर रिप्लेसमेंट स्टडी रिपोर्ट पेश नहीं की। साथ ही राज्य सरकार, अवैध खनन पर भी कोई विश्वसनीय रोक नहीं लगा पाई है। अवैध खनन पर रोक नहीं होने के कारण माफिया बेलगाम हो गये हैं। माफियाओं द्वारा निर्मित जोखिमग्रस्त परिस्थितियों को पिछले आलेख में वर्णित किया गया हैं। अवैध वसूली में शामिल रहे उत्तरदायी सरकारी कर्मियों ने स्थिति को ऐसी जगह पहुंचा दिया हैं कि अब समस्या नासूर बन गई हैं। 

इससे पूर्व के 2 आलेख में हम अवैध बजरी खनन की समस्या के कारण एवं प्रभावों के बारे में विभिन्न आयामों की जानकारी दे चुके हैं। जबकि इस आलेख में हमारा ध्यान सीधे इस समस्या से पार पाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गये प्रयासों एवं उनकी सीमओं का अध्ययन करने पर हैं।

1. अवैध खनन से जुडी विसंगतियों पर सरकार की प्रतिक्रिया और उनकी नियति

अवैध खनन से न तो राजस्व प्राप्त हो रहा है, और न ही पर्यावरण का निम्नीकरण रुक रहा है। इसलिए अवैध खनन से जुडी विसंगतियों को रोकने एवं समाप्त करने के लिए सरकार ने कई प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं, जो कि इस प्रकार हैं :

1.1. अवैध खनन पर रोक

अवैध खनन से जुडी विसंगतियों को रोकने के लिए सबसे पहले तो अवैध खनन पर रोक लगायी जानी चाहिए। इसके लिए जिला स्तर पर डीएम को जवाबदेह बनाया गया है। फिर भी इसके लिए प्रशासन द्वारा किये जाने वाले प्रयास नाकाफी हो रहे हैं। इसके बावजूद भी अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर रोक नहीं लग पायी हैं।

1.2. बजरी के वैध खनन को शुरू करवाने का प्रयास

राजस्थान सरकार ने खनन शुरू करवाने के लिए कई प्रयास किए हैं, इसके लिए किए गए विभिन्न उपाय इस प्रकार है :

  • फिर से नीलामी की तैयारी : राजस्थान सरकार ने 2018 में पुरानी नीलामी की खानों पर पर्यावरणीय अनुमति के अभाव में रोक लगा दी थी। ऐसे में सरकार ने फिर से नीलामी की तैयारी शुरू की थी। इस बार सरकार ने नीलामी के लिए 800 छोटे प्लाट राज्य भर में आवंटन के लिए चयनित किए। इनको लेकर आशा व्यक्त की जा रही थी कि इनका आकार छोटा होने के कारण पर्यावरण अनुमति में भी दिक्कत नहीं आएगी। ऐसे में नीलामी के बाद राज्य में बजरी खनन चालू हो सकेगा। लेकिन पुरानी नीलामी के मंशा पत्र धारकों द्वारा न्यायालय में चले जाने के कारण यह योजना अटक गई। [1]
  • निजी खातेदारी भूमि से खनन की अनुमति : सरकारी जमीन पर बजरी खनन पर रोक के बाद एक हेक्टेयर तक की निजी खातेदारी भूमि से खनन के लिए खान विभाग ने आवेदन आमंत्रित किये थे। परंतु इनमें से अधिकतर आवेदनों पर पर्यावरणीय अनुमति प्राप्त नहीं हो सकी। जहाँ कही अनुमति प्राप्त हुई, वहां खातेदारी भूमि की आड़ में नदी से खनन आरंभ हो गया। लोग नदी से बजरी भरकर लाते और खातेदारी भूमि के पास से रवन्ना लेकर आराम से परिवहन कर रहे थे। (अधिक विस्तृत 2.2 में)

1.3. बजरी पर रोक से विकास कार्य प्रभावित नही हो, इसलिए वर्क परमिट का प्रावधान 

सरकारी अवसंरचना विकास एवं निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली बजरी के खनन एवं परिवहन के लिए वर्क परमिट जारी किए जाते हैं। ताकि बजरी खनन पर रोक की वजह से विकास कार्य अवरुद्ध नहीं हो। लेकिन वर्क परमिट समस्या के समाधान के बजाय अपने आप में ही अवैध खनन का एक और जरिया बन गया।

1.4. बजरी के विकल्प के रूप में एम-सैंड को प्रोत्साहन

  • एम सैंड को बजरी के विकल्प के तौर पर देखा गया। बजरी खनन पर रोक के बाद राज्य में एम सैंड के संयंत्र लगना शुरू हो गये हैं। एम सैंड उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में राजस्थान प्रधान खनिज रियायत नियम 2017 में संशोधन प्रस्तावित है। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति 2019 में एम सैंड मैन्युफैक्चरिंग पर दी जाने वाली सहायता का विवरण है।
  • एम सैंड नीति की घोषणा [2]
  • कुछ जगह पर पत्थरों को पीसकर एम-सैंड तैयार की गई, लेकिन यह बजरी मकानों के कार्यों में ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाई।