राईसेम में सहकारी निरीक्षकों के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

सहकारिता अधीनस्थ सेवा के निरीक्षकों का फाउंडेशन कोर्स हरीश चन्द्र माथुर-राजस्थान लोक प्रशासन संस्थान (HCM-RIPA), जयपुर के मार्गदर्शन में राजस्थान सहकारिता शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (राईसेम), झालाना, जयपुर द्वारा आयोजित किया जाता है। RAS-2018 के माध्यम से नियुक्त निरीक्षकों का प्रशिक्षण दो समूहों में आयोजित किया गया, पहले समूह ने 11 मई 2011 से लेकर 5 जुलाई 2022 तक और दुसरे समूह ने 7 जुलाई 2022 से लेकर 30 अगस्त 2022 तक प्रशिक्षण प्राप्त किया। मेरा नंबर 80 लोगो के प्रथम समूह में ही आ गया था,  जबकि एक्सटेंशन लेने वाले और शेष अन्य साथियों का प्रशिक्षण कॉल दुसरे समूह में आया। ट्रेनिंग आर्डर आते ही हमने अपने-अपने कार्यालयों से कार्य मुक्त आदेश (Relieving order) प्राप्त किया और जयपुर के लिए रवाना हो गये। झालाना में राईसेम संस्थान स्थित हैं, इससे 400 मीटर की दुरी पर राईसेम हॉस्टल स्थित है। सबसे पहले हम हॉस्टल गये, जहां पर दो लोगो को एक रूम आवंटित किया गया। इसके बाद हम संस्थान गये, जहां पर अपने पदस्थापित कार्यालय से कार्यमुक्त आदेश, छ हजार रूपये हॉस्टल फीस की रसीद, 5-5 पासपोर्ट एवं स्टाम्प साइज़ फोटो जमा करवा कर एक आवेदन पत्र को भरके जमा करवाया। इसके बाद हमे अगले सप्ताह के कार्यक्रमों की सूची का एक पेज दिया गया।

उदघाटन समारोह
12 मई को उद्घाटन समारोह का कार्यक्रम था, इसमें माननीय सहकारिता मंत्री श्री उदय लाल आंजना जी मुख्य अतिथि थे। इस कार्यक्रम में OTS के महानिदेशक श्री वेंकटेश्वर, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार श्री मुक्तानंद अग्रवाल भी शामिल हुए। इसके अलावा राईसेम की निदेशक श्रीमती शिल्पी पांडे, अतिरिक्त निदेशक श्री मोरार सिंह जाड़ावत, उप रजिस्ट्रार श्रीमती सारिका गुप्ता एवं सहायक रजिस्ट्रार श्रीमती सीमा मालावत उपस्थित रही। इस समारोह के शुरू होने से पूर्व सभी को एक फोल्डर दिया गया, जिसमे एक प्रशिक्षण निर्देशिका, डायरी और एक पेन था, साथ ही एक पहचान पत्र दिया गया था।

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता किसानों से जुड़ा हुआ विभाग है। इसलिए संवेदनशील होकर किसानों की समस्याओं का सुलझाने का आव्हान किया। वही HCM-RIPA के महानिदेशक डॉ. आर. वेंकटेश्वरन ने कहा कि 3D-ड्यूटी, डिग्निटी एवं डिसिप्लिन का अपने कार्य के दौरान ध्यान रखे और नियमों की वाख्या जनता के हित में करे। रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल जी ने कहा कि सहकारिता के समक्ष अनेक चुनौतियां है फिर भी सहकारिता की प्रासंगिकता बनी हुई है। प्रशिक्षण के दौरान गंभीरता से सीखे, एक दुसरे की मदद करे और परिश्रम करके अपनी दक्षताओं में सुधार करे।

क्लास रूम एक्टिविटीज
अवकाश के दिनों को छोड़कर दो सत्रों में कक्षाये आयोजित होती थी। फाउंडेशन कोर्स के पाठ्यक्रम में 3 पेपर थे- 
  • प्रथम पेपर- राजस्थान की राजव्यवस्था, लोक प्रशासन, योजना एवं नीतियां।
  • द्वितीय पेपर - राजस्थान सेवा नियम (RSR), सामान्य वित्तीय एवं प्रशासनिक नियम (GF&AR), TA Rule।
  • तृतीय पेपर- कंप्यूटर एवं सूचना प्रोद्योगिकी।
इन पेपर में उल्लेखित टॉपिक पर कई विशेषज्ञों द्वारा सेशन लिए गये। इसके अलावा सहकारिता अधिनियम, ऑडिट से संबंधित कक्षाएं भी विभागीय जानकारी के लिए आयोजित की गई। तृतीय पेपर में कोई टॉपिक्स को कंप्यूटर लैब में प्रायोगिक तौर पर समझाया गया।
इसके अलावा कुछ सत्र गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के थे, जिन्हें द्वितीय पारी में आयोजित किया गया था। ये व्यक्तित्व विकास, पारस्परिक संबंध निर्माण के लिए महत्वपूर्ण थे-
  • आइस ब्रेकिंग सेशन : यह पहले दिन आयोजित किया गया, इसमें आपसी जान पहचान को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारी गतिविधियां करवाई गई थी। जैसे- लोगो को गृह जिले, जन्म तिथि के आधार पर साथ में खड़े करना, उनकी पारस्परिक विशेषताओं/समानताओं को पूछना आदि  
  • अंत्याक्षरी : इसमें गाने और नृत्य की गतिविधियां शामिल थी।
  • वाद-विवाद (Debate) : इसके लिए प्रशिक्षणार्थियों ने ही टॉपिक निर्धारित किए थे। 
  • मेडिकल चेक अप : डॉक्टर्स की टीम ने विभिन्न टेस्ट लिए और स्वास्थ्य को लेकर परामर्श प्रदान किया।
  • ऑफिसियल विजिट : झालाना में ही स्थित भामाशाह टेक्नो हब और भामाशाह स्टेट डाटा सेंटर का 40-40 के दो समूहों में विजिट करवाया गया।
हॉस्टल लाइफ
दो ट्रेनीज को एक रूम आवंटित किया गया था। रूम में बिस्तर, कुर्सी, मेज, एसी एवं अटैच्ड बाथरूम की सुविधा उपलब्ध थी। मेस में बेड टी, मॉर्निंग ब्रेकफास्ट, लंच एवं डिनर के अलावा दिन में 2 बार चाय-बिस्कुट शामिल थे। आवासीय सुविधा का कोई शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन भोजन के 300 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क लिया गया था।  हॉस्टल में होने वाले क्रियाकलापों में निम्न गतिविधियां शामिल थी- जैसे खेलकूद, जिम, मॉर्निंग एक्सरसाइज, बर्थडे सेलिब्रेशन। इसके अलावा उन सभी गतिविधियों के माध्यम से ट्रेनीज मनोरंजन करते थे, जो कि कॉलेज लाइफ में चलती है। कई स्थानों पर लघु समूहों में घुमने चले जाते थे।

परीक्षा 
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऊपर वर्णित तीन पेपरों के लिए एग्जाम आयोजित की गई थी। परीक्षा HCM-RIPA द्वारा करवायी गई थी। प्रोबेशन के बाद स्थायीकरण (Fixation) के लिए इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना आवश्यक था। इन तीन पेपर के अलावा टर्म पेपर एवं बुक रिव्यु और अन्य गतिविधियों के आधार पर भी अंक प्रदान किए गये थे।

निष्कर्ष
इस प्रकार फाउंडेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम में उन सभी आयामों पर जोर दिया गया, जो कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक होते हैं। हर सप्ताह ट्रेनीज से एक फीडबैक फॉर्म भरवाया जाता था, इससे ट्रेनिंग प्रोग्राम को अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलती थी। 

RAS-2018 के संदर्भ में मेडिकल एवं सेवा आवंटन प्रक्रिया

राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर द्वारा आयोजित होने वाली RAS परीक्षा में इंटरव्यू के बाद अंतिम परिणाम की घोषणा की जाती है। इस अंतिम परिणाम के आधार पर सेवाओं का आवंटन मेरिट एवं विज्ञापित रिक्तियों के अनुसार किया जाता हैं। सेवा आवंटन से पूर्व मेडिकल टेस्ट एवं पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूर्ण की जाती हैं। इस आलेख में RAS-2018 को आधार मानकर सेवा आवंटन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों का विवरण दिया गया हैं।

 RAS-2018 भर्ती की प्रक्रिया काफी लंबी चली थी। जुलाई 2021 में परिणाम घोषित होने के बाद 25 दिसम्बर 2021 को जाकर सफल अभ्यर्थियों को विभिन्न पदों को आवंटित किया गया। RAS के परिणाम एवं पद आवंटन की प्रक्रिया कई मायनों में UPSC से भिन्न हो जाती हैं। इस आलेख में हम UPSC के सापेक्ष तुलनात्मक अध्ययन करते हुए सेवा आवंटन तक की प्रक्रिया को समझेंगे।

परीक्षा में सेवा आवंटन की प्रक्रिया तक के विभिन्न चरण इस प्रकार हैं-

अंतिम परिणाम घोषित होना 

अंतिम दिन के इंटरव्यू के दिन ही अंतिम परिणाम घोषित किया जाता है। अंतिम परिणाम में कुल प्राप्तांकों के आधार पर सभी इंटरव्यू में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की श्रेणी-वार रैंक जारी की जाती हैं। इससे यह निर्धारित नहीं हो पाता है कि अंतिम किस रैंक तक उम्मीदवारों को सेवा आवंटन हो जाएगा।

इसके विपरीत UPSC में अंतिम परिणाम में उन ही अभ्यर्थियों को शामिल किया जाता हैं, जिन्हें सेवा आवंटन होना होता हैं। इसका कारण यह हैं कि इंटरव्यू के दौरान ही कार्मिक विभाग मेडिकल टेस्ट एवं पुलिस वेरिफिकेशन की कार्यवाही पूर्ण कर लेता हैं। जबकि RAS में RPSC एवं DOP दोनों के मध्य यह समन्वय नहीं रहता हैं।      

मेडिकल टेस्ट

एक रफ़ सेवा आवंटन कार्मिक विभाग द्वारा किया जाता हैं और इस रफ़ सर्विस एलोकेशन में जिस रैंक तक सेवा आवंटन की संभावना होती हैं, वहां तक रैंक वाले अभ्यर्थियों को संभाग स्तर पर चिकित्सा परीक्षण के लिए भेजा जाता हैं। 

कार्मिक विभाग द्वारा चिकित्सा परीक्षण का कार्यक्रम निर्धारित किया जाता हैं। संभाग स्तर पर स्थित हॉस्पिटल में मेडिकल टेस्ट के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया जाता हैं।

मेरा अनुभव 

मेरा मेडिकल सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर में हुआ था। मेरे साथ कुछ और भी लोग थे। वहां पर हमारी प्रक्रिया दो दिन चली थी, जिसका विवरण इस प्रकार हैं -

प्रथम दिन: हम मेडिकल टेस्ट के लिए निर्धारित रूम के बाहर खड़े थे। तभी कार्मिक विभाग का एक प्रतिनिधि आया और उसने अंदर अभ्यर्थियों की लिस्ट दी। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए मूत्र, खून, ECG और X-Ray टेस्ट के लिए पर्ची देकर DOP प्रतिनिधि के साथ हमे संबंधित प्रयोगशालाओं में भेज दिया गया। सभी प्रयोगशालाओं में सैंपल देने के बाद हमे अगले दिन आने की बोला गया ताकि तब तक सैंपल्स की रिपोर्ट आ जाए।

द्वितीय दिन : दुसरे दिन हमे Eye Test के लिए भेज दिया गया। हमारे साथ एक फॉर्म था, जिसमे डॉक्टर ने सभी की आँखों का विवरण लिख दिया। इसके बाद फिर से हम फिजिकल एग्जामिनेशन रूम के बाहर आ गये। यहाँ पर एक डॉक्टर ने सभी को बारी बारी से बुलाकर हर्निया की जांच की। इसके कुछ देर बाद फिजिकल टेस्ट करने वाला डॉक्टर आया, उसने ऊंचाई, छाती का प्रसार, वजन आदि माप नोट की और फ्लेट फीट का टेस्ट भी किया। इस प्रकार सारे टेस्ट होने के बाद हमसे फॉर्म में कुछ और अतिरिक्त जानकारी भरवाई गई। इसके बाद DOP प्रतिनिधि ने कहा कि अब आप जा सकते हो।

री-मेडिकल

कार्मिक विभाग का प्रतिनिधि सारे टेस्ट होने के बाद आवेदक के फॉर्म को ले जाता हैं। उस फॉर्म में सभी टेस्टों के बारे में उम्मीदवार का विवरण होता हैं। फॉर्म का कार्मिक विभाग द्वारा परीक्षण किया जाता हैं और उसके उपरांत कुछ मामलों में कुछ दिन के अंतराल के बाद उम्मीदवारों को री-मेडिकल के लिए बुलाया जाता है। कुछ अभ्यर्थियों के कुछ मेडिकल टेस्ट मापदंडों के अनुरूप नहीं आते हैं, ऐसे अभ्यर्थियों को कुछ दिन के उपरांत री-मेडिकल के लिए बुलाया जाता हैं। कुछ उम्मीदवार विभिन्न कारणों से अनुपस्थित रह जाते है, ऐसे अभ्यर्थियों को दूसरा अवसर दिया जाता हैं।

कुछ अन्य उम्मीदवारों को मेडिकल के लिए बुलावा

मेडिकल टेस्ट होने तक बहुत सारे उम्मीदवार अपने को मिलने वाली पोस्ट का अंदाजा लगा चुके होते हैं और अगर उनकी सेवा में कोई बदलाव की आशंका नही हो या पहले से कही दूसरी जगह अधिक लाभदायक पद पर हो तो ऐसे अभ्यर्थी मेडिकल टेस्ट से अनुपस्थित रह जाते हैं। इंटरव्यू रिजल्ट और मेडिकल की प्रक्रिया तीन से चार महीने ले लेती हैं, ऐसे में कुछ लोगो का UPSC में भी हो जाता हैं तो वे मेडिकल देने के बाद भी कार्मिक विभाग में शपथ पत्र देकर अपनी अभ्यर्थना वापस ले लेते हैं। इस प्रकार कुछ रिक्तियां सृजित हो जाती हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए संबंधित वर्ग से मेरिट के अनुसार अगले अभ्यर्थियों को मेडिकल के लिए बुलाया जाता हैं। यह एक प्रकार से अप्रत्यक्ष प्रतीक्षा सूची का कार्य करती हैं। इससे 5-10 अभ्यर्थी आसानी से लाभान्वित हो जाते हैं।   

सेवा आवंटन 

मेडिकल टेस्ट हो जाने वाले अभ्यर्थियों का समानांतर रूप से पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाता हैं। सभी अभ्यर्थियों के मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन हो जाने के बाद सर्विस एलोकेशन जारी कर दिया जाता हैं। यह आवंटन कार्मिक विभाग द्वारा संबंधित विभागों को भेजा जाता है, फिर संबंधित विभाग द्वारा ही अभ्यर्थियों को अग्रिम निर्देशों के साथ नियुक्ति की सूचना भेजी जाती हैं।   

प्रशिक्षण एवं फील्ड पोस्टिंग 

सेवा आवंटन आने के बाद संबंधित विभागों में रिपोर्ट करना होता हैं। जो अभ्यर्थी विभिन्न कारणों से तत्काल नियुक्ति नहीं चाहते हैं, वे नियुक्ति तिथि में विस्तार (Extension) के लिए आवेदन दे देते हैं। बाकी उम्मीदवार नियुक्ति ग्रहण संबंधित आवेदन एवं शपथ पत्र को भरके जमा करवाते हैं। ऐसी सेवाएँ जिनमे तत्काल प्रशिक्षण शुरू होना है, उनमे नियुक्ति संबंधित विस्तार (Extension) की अनुमति नहीं होती हैं।  

कुछ सेवाओं में सीधे HCM-RIPA, Jaipur में ही रिपोर्ट करना होता हैं, जैसे- RAS, RPS, RAcS एवं अन्य। इनमे नियुक्ति ग्रहण संबंधित कागजी कार्यवाही प्रशिक्षण स्थल पर ही हो जाती हैं, विभागों में जाने की जरुरत नहीं रहती। यही पर संबंधित विभागों के प्रतिनिधि आ जाते हैं।

नियुक्ति ग्रहण करने के बाद में कुछ सेवाओं में तत्काल आधारभूत प्रशिक्षण शुरू हो जाता हैं। राज्य सेवाओं का प्रशिक्षण OTS, जयपुर में होता हैं। कुछ सेवाओं का प्रशिक्षण RIPA के अन्य केन्द्रों उदयपुर एवं कोटा में भी होता हैं। अधीनस्थ सेवाओं में कुछ विभागों के अपने प्रशिक्षण केंद्र होते हैं, जैसे तहसीलदार सेवा के लिए अजमेर में, सहकारिता अधीनस्थ सेवा के लिए झालाना में राईसेम आदि।

जिन सेवाओं में तत्काल प्रशिक्षण शुरू नहीं होता, उनमे फिल्ड में अटेच कर दिया जाता हैं या पोस्टिंग दे दी जाती हैं। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षण के लिए बाद में बुलाया जाता हैं। 

UPSC के सापेक्ष तुलना 

UPSC के सापेक्ष तुलना करने पर हम पाते है कि मेडिकल एवं पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया इंटरव्यू के समानांतर पूर्ण की जा सकती हैं। इसके लिए कार्मिक विभाग एवं  RPSC के मध्य समन्वय स्थापित करना होगा। इससे प्रक्रिया को तीव्र करने में सहायता मिलेगी। 

निष्कर्ष

इस प्रकार RAS में अंतिम परिणाम से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया में विभिन्न चरण शामिल हैं, जो कई मायनों में केन्द्रीय सिविल सेवाओं से भिन्न हैं। इसमें अत्यधिक समय लगने की समस्या काफी गंभीर हैं, जिसे कम किए जाने की आवश्यकता हैं।